पसीना आने का मतलब है कि आपको कुछ समस्या है।
पसीना अधिक आने को हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं।
इस स्थिति से निपटने के लिए कम नमक खाएं।
कुछ लोग गर्मियों में वर्कआउट करना बहुत पसंद करते हैं। क्योंकि गर्मी में पसीना ज्यादा निकलता है जिससे जल्दी वजन कम होता है।
लेकिन जिनको बहुत अधिक पसीना निकलता है... उनका क्या?
ऐसे में वजन तो कम हो जाएगा... लेकिन क्या इसके साथ शरीर में पानी की कमी भी हो जाएगी। तो क्या किया जाए...?
मालुम नहीं...
तो फिर ये लेख पढ़ें।
इस स्थिति को हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। पसीना आना एक सामान्य स्थिति है लेकिन जब ये अधिक मात्रा में आता है तो इससे इंसान शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से असहज हो जाता है। इस स्थिति पर लोगों का जल्दी ध्यान भी नहीं जाता और कुछ लोग इसके लिए गंभीर भी नहीं होते। जबकि अधिक पसीना आना कई बीमारियों की तरफ इशारा भी करता है।
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ये हैं बीमारियां
वंशानुगत बीमारी - ये बीमारी कई बार वंशानुगत भी होती है।
सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस - कई बार अधिक पसीना शारीरिक समस्या की वजह से भी आता है। इस स्थिति को सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं। इस समस्या में इंसान को ठंड में भी पसीना आता है। अगर इंसान एसी वाले कमरे में बैठा है तो उसे वहां भी पसीना आता है। इससे बचने के लिए बोटॉक्स नामक मशहूर टॉक्सिन टाइप ए का कांख में इस्तेमाल करें। इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने के बाद इस समस्या से बचा जा सकता है। यह प्रोडक्ट यह अतिसक्रिय पसीना ग्रंथि की तंत्रिकाओं को शांत करता है, जिससे पसीना कम आने लगता है।
प्राइमरी एक्सिलरी हाइपरहाइड्रोसिस - इस स्थिति में इंसान को केवल बाजुओं के तरफ पसीना आता है। इस स्थिति में बोटॉक्स का इस्तेमाल करने पर एफडीए की मंजूरी मिली हुई है।
फोकल हाइपरहाइड्रोसिस - कई लोगों को केवल चेहरे पर पसीना आता है। इस स्थिति को फोकल हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं। ऐसी स्थिति को मेसो बोटॉक्स सबसे अच्छा उपाय है।
नोट- बोटॉक्स का इस्तेमाल करने से पहले एक बार चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। THANKS