क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप अपने फोन में पासवर्ड डालते हैं तो आपके हाथों में फोन थोड़ा सा हिलता है। अगर इस पर गौर नहीं किया है तो अब इसका ध्यान रखिए। एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। न्यूकैसल यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में इस बात का पता चला है कि फोन में जब कोई पिन या पासवर्ड डाल रहा हो तो उसके फोन में होने वाले मूवमेंट से पासवर्ड का पता चल सकता है। रिसर्चर्स ने ऐसा करके भी दिखाया। वह पासवर्ड का पता लगाने में सफल रहे। जब फोन में पहली बार पासवर्ड डाला तो वह 70 फीसदी ठीक था। पांचवी बार में पासवर्ड 100 फीसदी सही निकला। विशेषज्ञों ने यह खुलासा किया है और चेतावनी दी है कि कुछ वेबसाइट्स और आपके फोन में इंस्टॉल हुई कोई ऐप कितनी आसानी से आपकी जासूसी कर सकती हैं।
बता दे की स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग साइंस की एक रिसर्च फेलो मरियम मेहरनेजहाद ने बताया कि स्मार्टफोन में जीपीएस, कैमरा, माइक्रोफोन, रोटेशन सेंशर और एक्सेलेरोमीटर आदि होते हैं। ज्यादातर मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स में इनके इस्तेमाल के लिए यूजर की परमीशन की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे में कुछ असुरक्षित प्रोग्राम चोरी-चोरी आपके सेंसर से डेटा चुरा सकते हैं और उसका इस्तेमाल संवेदनशील जानकारी जैसे कि कॉल करने की टाइमिंग, शारीरिक गतिविधि, यहां तक कि आपके टच एक्शन, पिन और पासवर्ड तक की चोरी हो सकती है। ज्यादातर मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स में ऐसे प्रोग्राम होते हैं जो गुपचुप तरीके से आपके सेंसर डेटा में सेंध लगाते हैं।
गौर हो की इंटरनेशनल जरनल ऑफ इन्फोर्मेशन सिक्योरिटी के मुताबिक इन सबसे बचने का कोई आसान रास्ता अभी नहीं है। टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों को इस समस्या के बारे में जानकारी है लेकिन उन्हें इसके सुलझाने के तरीके के बारे में जानकारी नहीं है। मरियम ने बताया कि ज्यादा चिंता की बात यह है कि कुछ ब्राउजर, जिनमें हमने पाया कि जब आप उन्हें अपने मोबाइल या टैबलेट पर खोलते हैं, वो पहले गड़बड़ी पैदा करने वाले कोड को होस्ट करते हैं फिर खुलते हैं। उदाहरण के लिए अगर आप पिछला टैब बंद किए बिना अगर अपने ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो वो आपके द्वारा दर्ज की गई हर निजी जानकारी चुरा सकते हैं।
बता दे की स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग साइंस की एक रिसर्च फेलो मरियम मेहरनेजहाद ने बताया कि स्मार्टफोन में जीपीएस, कैमरा, माइक्रोफोन, रोटेशन सेंशर और एक्सेलेरोमीटर आदि होते हैं। ज्यादातर मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स में इनके इस्तेमाल के लिए यूजर की परमीशन की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे में कुछ असुरक्षित प्रोग्राम चोरी-चोरी आपके सेंसर से डेटा चुरा सकते हैं और उसका इस्तेमाल संवेदनशील जानकारी जैसे कि कॉल करने की टाइमिंग, शारीरिक गतिविधि, यहां तक कि आपके टच एक्शन, पिन और पासवर्ड तक की चोरी हो सकती है। ज्यादातर मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स में ऐसे प्रोग्राम होते हैं जो गुपचुप तरीके से आपके सेंसर डेटा में सेंध लगाते हैं।
गौर हो की इंटरनेशनल जरनल ऑफ इन्फोर्मेशन सिक्योरिटी के मुताबिक इन सबसे बचने का कोई आसान रास्ता अभी नहीं है। टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों को इस समस्या के बारे में जानकारी है लेकिन उन्हें इसके सुलझाने के तरीके के बारे में जानकारी नहीं है। मरियम ने बताया कि ज्यादा चिंता की बात यह है कि कुछ ब्राउजर, जिनमें हमने पाया कि जब आप उन्हें अपने मोबाइल या टैबलेट पर खोलते हैं, वो पहले गड़बड़ी पैदा करने वाले कोड को होस्ट करते हैं फिर खुलते हैं। उदाहरण के लिए अगर आप पिछला टैब बंद किए बिना अगर अपने ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो वो आपके द्वारा दर्ज की गई हर निजी जानकारी चुरा सकते हैं।